The Maa Mahamaya Mandir, situated in Hardi village in the Janjgir district of Chhattisgarh, India, is a revered Hindu temple dedicated to Goddess Mahamaya. This sacred site holds significant religious importance for devotees who flock here seeking blessings and spiritual solace.

हरदी के इस मंदिर में होता है अनोखा चमत्कार! नवरात्रि के सांतवे दिन शेर पर सवार होकर आती है मां
मां महामाया मंदिर के पुजारी पंडित शाश्वत पांडे जी ने 18 तारीख को स्थानीय समुदाय को बताया कि देवी महामाया यहां सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। विशेष रूप से, ऐसा माना जाता है कि वह नि:संतान दंपत्तियों को माता-पिता बनने की खुशी का आशीर्वाद देती हैं। हर साल चैत्र और कुवार दोनों नवरात्रि के दौरान, सातवें दिन (सप्तमी) की रात को विशेष प्रार्थना और अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। मंदिर के गर्भगृह में देवी की मूर्ति के सामने आटा बिखेरा जाता है। देवी को प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है, जिसमें पंचमेवा के साथ बीड़ापान जैसी मिठाइयां, साथ ही 21-21 मेवे, इलायची और पान के पत्ते शामिल होते हैं। प्रसाद को एक थाली में खूबसूरती से व्यवस्थित किया जाता है और भगवान को चढ़ाया जाता है।
चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है और देवी मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. वहीं आज हम आपको हरदी के मां महामाया मंदिर की बारे में बताने वाले हैं, जिसकी मान्यता काफी खास है.आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिला मुख्यालय से 15-16 किलोमीटर दूर हरदी ग्राम है, जहां पहाड़ पर मां महामाया देवी मंदिर में विराजमान हैं. प्रतिवर्ष चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि में पूरे नौ दिन तक विशेष पूजा पाठ की जाती है. इसके साथ ही दोनों नवरात्रि में सप्तमी के दिन यहां देवी मां स्वयं आने का प्रमाण देती हैं.
माता देती हैं अपने आने का प्रमाण
उसके बाद रात 12 बजे से 1 बजे तक एक घंटे के लिए मंदिर के दरवाजे सबके सामने बंद कर दिए जाते हैं और अंदर कोई नहीं होता है। इसके साथ ही मंदिर के सभी कैमरों पर कपड़े बांध दिए गए हैं और चारों ओर अंधेरा फैला हुआ है. पुजारी ने बताया कि एक घंटे बाद जब मंदिर का दरवाजा भक्तों के दर्शन के लिए दोबारा खोला जाता है, तब मां भक्तों को अपनी उपस्थिति का अहसास कराती हैं। कभी जमीन पर फैले आटे पर माता के पैरों के निशान दिखाई देते हैं तो कभी शेर के पंजे के निशान साफ नजर आते हैं. इस बीच, मंदिर का दरवाजा खुलने के बाद जब बर्तन में रखे प्रसाद की गिनती की गई तो एक चीज गायब मिली। यहां मान्यता है कि सप्तमी की रात मां महामाया देवी शेर पर सवार होकर यहां आती हैं और भक्तों को अपने आगमन का प्रमाण भी देती हैं
वर्षों से चली आ रही परंपरा
पंडित जी ने Local 18 को आगे बताते हैं कि इस मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है. यहां महामाया देवी मां का मंदिर नीम पेड़ के नीचे स्थापित हैं. यहां शाम के समय महाआरती की जाती है, जिसमें हर रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. वहीं नवरात्रि में सप्तमी की रात शेर के पंजे के निशान देखने काफी ज्यादा संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं. मंदिर में यह परंपरा सालों से चलती आ रही है. हर साल नवरात्रि में कपाट खुलने के बाद शेर के पदचिह्न के निशान या माता के पदचिन्ह भक्तों को देखने को मिलते हैं.